उत्तराखंड समाचार: कांवड़ यात्रा अपने अंतिम चरण में, हरिद्वार में उमड़ा आस्था का जनसैलाब; पहाड़ों में भारी बारिश का अलर्ट जारी
देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड में मानसून के सक्रिय रहने के साथ-साथ प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। राज्य में एक तरफ जहां शिवभक्तों की भारी भीड़ और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी ने शासन और प्रशासन की सतर्कता बढ़ा दी है।
कांवड़ यात्रा का अंतिम चरण और सुरक्षा व्यवस्था
हरिद्वार में डाक कांवड़ के आगमन के साथ ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार पहुंचकर कांवड़ियों का स्वागत किया। इस दौरान हेलीकॉप्टर से शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा की गई और उनके चरण प्रक्षालन कर अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तराखंड पुलिस और जिला प्रशासन धरातल पर पूरी मुस्तैदी से जुटा हुआ है। कांवड़ मार्गों पर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी का सहारा लिया जा रहा है। अधिकारी सीधे कंट्रोल रूम से हर स्थिति पर नजर रख रहे हैं। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जल पुलिस और स्थानीय पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है तथा श्रद्धालुओं से निर्धारित घाटों पर ही स्नान करने की अपील की जा रही है।
यातायात दबाव और डायवर्जन
डाक कांवड़ियों की बढ़ती संख्या के कारण हरिद्वार और उसके आसपास के राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात का भारी दबाव है। हरिद्वार-देहरादून, हरिद्वार-मुजफ्फरनगर और दिल्ली-हरिद्वार मार्गों पर व्यापक वाहन प्रतिबंध और डायवर्जन लागू किए गए हैं। पुलिस वैकल्पिक मार्गों के जरिए यातायात को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। आम यात्रियों और श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मार्ग और डायवर्जन की अद्यतन स्थिति अवश्य जांच लें।
पहाड़ों में बारिश का अलर्ट और प्रशासन की तैयारी
मौसम विभाग के अनुसार राज्य में अगले चार दिनों तक मानसून सक्रिय रहेगा। बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चमोली जिलों में विशेष रूप से भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका और सड़कें बाधित होने के खतरे को देखते हुए संबंधित जिला प्रशासनों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मैदानी क्षेत्रों में भी मौसम का असर दिख रहा है। हरिद्वार में गरज-चमक के साथ बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है, जिससे प्रशासन के सामने मौसम और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को एक साथ संभालने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करने वाले यात्रियों और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे नदी-नालों के पास जाने से बचें और संवेदनशील मार्गों पर सतर्कता बरतें।