ऋषिकेश: स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने घी संक्रांति (घ्यू त्यार, ओल्गिया) पर्व के महत्व पर बात की। उन्होंने कहा कि यह पर्व उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और पर्वतीय जीवनशैली का प्रतीक है। इसका संबंध भूमि, अन्न और पशुधन से है और यह किसानों व पशुपालकों की मेहनत का सम्मान है। यह पर्व सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को भी मजबूत करता है।
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