हरिद्वार: हरिद्वार के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने ग्राम माधोपुर में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में तालाब में डूबने से हुई मौत के मामले में एक उप निरीक्षक, दो कांस्टेबल सहित छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश गंगनहर रुड़की कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक को दिए गए हैं।
मृतक वसीम के भाई अल्लाउद्दीन ने न्यायालय में बी.एन.एस.एस. की धारा 175 (3) के तहत एक प्रार्थना पत्र दिया था। प्रार्थना पत्र के अनुसार, 24 अगस्त 2024 को वसीम अपनी बहन से मिलने माधोपुर गया था। उसी रात करीब 1:30 बजे घर लौटते समय गांव के तालाब के पास उप निरीक्षक शरद सिंह, कांस्टेबल सुनील सैनी, कांस्टेबल प्रवीण सैनी और तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों ने उसे रोका। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने वसीम को लाठी-डंडों से पीटा और जान से मारने की नीयत से सड़क किनारे तालाब में धकेल दिया।
अल्लाउद्दीन ने बताया कि वसीम ने बचने के लिए शोर मचाया और तालाब से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे निकलने नहीं दिया। शोर सुनकर गांव के कई लोग मौके पर पहुंचे और उन्होंने टॉर्च व मोबाइल की रोशनी में पूरी घटना देखी। जब गांव वालों ने वसीम को बचाने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें गोली मारने की धमकी देकर भगा दिया।
मौके पर मौजूद लोगों ने अल्लाउद्दीन को घटना की जानकारी दी थी। इसके बाद अल्लाउद्दीन ने 25 अगस्त 2024 को कोतवाली गंगनहर में पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। वसीम के पोस्टमार्टम में उसके शरीर पर गंभीर चोटें पाई गई थीं। न्यायालय ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद सभी 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।