* डिजिटल इंडिया की दिशा में जिला प्रशासन की प्रभावी पहल,
* डिजिटल सेवाओं को मिलेगी नई गति, ई-गवर्नेंस व्यवस्था होगी और मजबूत
* एनआईसी के आधुनिकीकरण से प्रशासनिक सेवाओं में आएगी तेजी- डीएम
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल ने शनिवार को कलेक्ट्रेट स्थित नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) कार्यालय के नव-नवीनीकृत परिसर का उद्घाटन किया।जिलाधिकारी के विशेष प्रयासों से कार्यालय का आधुनिक सुविधाओं के अनुरूप रिनोवेशन कराया गया है, जिससे कार्यालय की कार्यप्रणाली अधिक सुव्यवस्थित,तकनीक-सक्षम एवं प्रभावी बन सकेगी। नवीनीकरण कार्य के अंतर्गत समस्त तकनीकी एवं स्टाफ ऑपरेटरों के लिए बेहतर कार्यस्थल, आधुनिक संसाधन तथा आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।कार्यालय परिसर को तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए जाने से कर्मचारियों को कार्य निष्पादन में अधिक सहूलियत मिलेगी और डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि एनआईसी शासन और प्रशासन की डिजिटल व्यवस्थाओं की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।कार्यालय के सुदृढ़ीकरण से ई-गवर्नेंस से जुड़ी गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा विभिन्न विभागों के कार्यों का संचालन और अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।उन्होंने कहा कि विशेष रूप से निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के सफल एवं सुचारु संचालन में यह व्यवस्था अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।इस अवसर पर एनआईसी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नवीन सुविधाओं से कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा कार्य निष्पादन में सरलता और गति आएगी।जिला सूचना विज्ञान अधिकारी ने कहा कि शासन की विभिन्न डिजिटल सेवाएं अब अधिक सुगमता,पारदर्शिता और दक्षता के साथ आम जनता तक पहुंच सकेंगी,जिससे इस पहल का प्रत्यक्ष लाभ नागरिकों को मिलेगा।कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह,अपर जिलाधिकारी (वि.रा) केके मिश्रा,एसडीएम सदर कुमकुम जोशी, सचिवालय एनआईसी राज्य इकाई प्रमुख (उप महानिदेशक) अरविंद कुमार दाधीचि,अपर राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी राजीव जोशी,वरिष्ठ निदेशक आईटी,जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पाण्डे,अपर जिला सूचना विज्ञान अधिकारी दीप्ति चमोली तथा अर्थ एवं संख्याधिकारी शशि कांत गिरी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
एक ही दिन में राष्ट्रीय लोक अदालत में 9080 मामलों का निस्तारण
* 15,54,76,001/-रू०की धनराशि पर समझौता

देहरादून: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण,नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून के तत्वावधान में शनिवार को जिला मुख्यालय देहरादून,बाह्य न्यायालय ऋषिकेश,विकासनगर,डोईवाला,मसूरी एवं चकराता के न्यायालयों में वर्ष 2026की द्वितीय राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस लोक अदालत में मोटर दुर्घटना क्लेम, सिविल मामले,पारिवारिक मामलें, चौक बाउन्स से सम्बंधित मामलें,शमनीय प्रकृति के आपराधिक मामलें तथा अन्य प्रकृति के मामले लगाये गये थे।इस लोक अदालत में जनपद देहरादून में फौजदारी के शमनीय प्रकृति के 251 मामलें,चेक सम्बंधी 515 मामले,धन वसूली सम्बंधी 17 मामले,मोटर दुर्घटना क्लेम ट्राईबनल के 14 मामले पारिवारिक विवाद सम्बंधी 105मामले,पब्लिक यूटिलिटी सर्विस सम्बंधी 26मामले,मोटर वाहन अधिनियम के अन्तर्गत शमनीय अपराधों के 4835 मामलें,उपभोक्ता फोरम सम्बंधी 12 एवं अन्य सिविल प्रकृति के 34मामलों,आर्बिट्रेशन सम्बंधी के 9 मामले,अन्य समझौते योग्य 26मामले सहित कुल 5844मामलों का निस्तारण किया गया तथा 13,36,35,816/-रू०की धनराशि पर समझौता हुआ।बाहय न्यायालय,विकासनगर के न्यायिक अधिकारियों द्वारा लोक अदालत में कुल 978मामलों का आपसी राजीनामे के आधार पर निस्तारण किया गया,जिसमें कुल 22,67,653/-रू० की धनराशि पर समझौता किया गया तथा बाह्य न्यायालय ऋषिकेश के न्यायिक अधिकारियों द्वारा लोक अदालत में कुल 537 मामलों का निस्तारण कर कुल 2,31,40,051/-रुपये की धनराशि पर समझौता किया गया। बाह्य न्यायालय डोईवाला द्वारा 242 मामलों का निस्तारण कर कुल 22,80,000/-रूपये की धनराशि पर समझौता किया गया। बाह्य न्यायालय मसूरी द्वारा 56मामलों का निस्तारण कर कुल 47,55,492/-रूपये की धनराशि पर समझौता किया गया।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ,देहरादून की सचिव एवं वरिष्ठ सिविल जज श्रीमती सीमा डुंगराकोटी द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालतें न्याय प्रणाली की गरिमा को सुदृढ़ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।लोक अदालतों के माध्यम से आपसी सहमति सौहार्द एवं संवाद की भावना को प्रोत्साहन मिलता है,जिससे समाज में शांति,भाईचारे एवं सामंजस्यपूर्ण वातावरण का निर्माण होता है।उन्होंने बताया कि लोक अदालतें आमजन को सरल,सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का एक सशक्त एवं प्रभावी माध्यम है। लोक अदालतों में पारित किए गए निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होते हैं तथा प्रकरणों के निस्तारण उपरांत पक्षकारों को उनके द्वाना जमा किया गया न्याय शुल्क भी वापस किया जाता है।इस राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न बैंकों व अन्य संस्थानों द्वारा प्री-लिटिगेशन स्तर के मामले भी निस्तारित किये गये।उक्त लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन स्तर के कुल 3236 गामलों का सफल निस्तारण किया गया तथा 2,18,40,185 /-की धनराशि पर पक्षकारों के मध्य समझौता हुआ।