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देवभूमि रजत उत्सव 2025″ : उत्तराखंड की विकास यात्रा और भविष्य की ओर कद

देवभूमि रजत उत्सव 2025″ का विस्तृत विश्लेषण: उत्तराखंड की विकास यात्रा और भविष्य की ओर कदम
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हरिद्वार में आयोजित “देवभूमि रजत उत्सव 2025” उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष पूरे होने का एक महत्वपूर्ण अवसर था। यह उत्सव मात्र एक समारोह नहीं, बल्कि राज्य आंदोलनकारियों और मातृशक्ति के प्रति समर्पित एक भावांजलि थी, जिसने राज्य निर्माण के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नमन किया।
रजत जयंती उत्सव: भावांजलि और गौरव का संदेश
मुख्यमंत्री श्री धामी ने स्पष्ट किया कि यह अवसर उन सभी राज्य आंदोलनकारियों, माताओं-बहनों और युवाओं को श्रद्धांजलि देने का है, जिन्होंने उत्तराखंड राज्य की स्थापना के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य देश और दुनिया को यह संदेश देना था कि उत्तराखंड अपनी परंपराओं में रचा-बसा होने के साथ ही भविष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
चुनौतियों से विकास के मानक तक: उत्तराखंड की 25 वर्षीय यात्रा
मुख्यमंत्री ने राज्य के शुरुआती 25 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला, जिसमें निम्नलिखित चरण शामिल हैं:

  • ​प्रारंभिक चुनौतियाँ: वर्ष 2000 में, उत्तराखंड भौगोलिक कठिनाइयों, सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों से घिरा एक नवजात राज्य था।
  • ​विकास के नए मानक: पिछले 25 वर्षों में, राज्य ने इन चुनौतियों से लड़कर न केवल प्रगति की है, बल्कि विकास के नए मानक स्थापित किए हैं। यह प्रगति जनता के अटूट विश्वास से संभव हुई है।
  • ​राज्य की पहचान: उत्तराखंड की पहचान केवल अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता से नहीं है, बल्कि यह समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और अटूट आस्था का भी प्रतीक है।
    ​ सर्वसमावेशी विकास: शासन और योजनाओं का दृष्टिकोण
    ​प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए एक सर्वसमावेशी दृष्टिकोण अपनाया गया है, जो गांव से शहर तक और मातृशक्ति से श्रमशक्ति तक हर वर्ग को लक्षित करता है:
  • ​आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, खेल, पेयजल और हवाई कनेक्टिविटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
  • ​आत्मनिर्भरता की दिशा: लोकल फॉर वोकल, मेक इन इंडिया, और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से ‘विकसित भारत एवं विकसित उत्तराखंड’ के स्वप्न को साकार किया जा रहा है।
  • ​स्थानीय अर्थव्यवस्था: स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य जारी है।
    ​ जनहित में लिए गए कठोर और महत्वपूर्ण निर्णय
    ​मुख्यमंत्री श्री धामी ने अपने कार्यकाल में जनहित में लिए गए कुछ कठोर और निर्णायक कदमों को रेखांकित किया:वर्ग निर्णय/पहल
    सख्त कानून धर्मांतरण विरोधी कानून, सख्त दंगारोधी कानून, और नकल विरोधी कानून।
    सामाजिक-धार्मिक पहलें लैंड जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद पर कार्रवाई; समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू करना; अवैध मदरसों पर कार्रवाई; और ऑपरेशन कालनेमि अभियान।
    भ्रष्टाचार पर नीति भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत कठोर कार्यवाही।

हरिद्वार का विकास और कुंभ 2027 की तैयारी
​मुख्यमंत्री ने हरिद्वार को विश्वस्तरीय शहर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और प्रमुख विकास परियोजनाओं का विवरण दिया:

  • ​शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर: ₹186 करोड़ का सीवरेज नेटवर्क और ₹187 करोड़ से अधिक की पेयजल परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
  • ​स्वास्थ्य और शिक्षा: मेडिकल कॉलेज का निर्माण और लालढांग क्षेत्र में मॉडल डिग्री कॉलेज की स्थापना।
  • ​कनेक्टिविटी और कॉरिडोर: ​हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर का निर्माण (काशी विश्वनाथ और उज्जैन महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर), जिसकी डीपीआर तैयार है। ​हरकी पैड़ी से मां चंडी देवी तक रोपवे का निर्माण। ​हरिद्वार में हेलीपोर्ट और लालढ़ांग की बरसाती नदी में पुल का निर्माण।
    ​⚠️ कुंभ 2027 की तैयारी पर सख्त चेतावनी
    ​मुख्यमंत्री ने कुंभ 2027 की तैयारियों पर बल दिया, लेकिन निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को गुणवत्तापूर्ण निर्माण करने की स्पष्ट चेतावनी दी, अन्यथा कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
    ​🤖 तकनीक और परंपरा का संगम: AI रोबोट का योगदान
    ​उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण अत्याधुनिक एआई (AI) रोबोट था, जिसने मंच से “डिजिटल इंडिया” की सफलता गाथा सुनाई। रोबोट ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान की उपलब्धियों का बखान किया और बताया कि कैसे भारत आज विश्व का टेक्नोलॉजी हब बन चुका है। यह तकनीकी प्रस्तुति कार्यक्रम में आधुनिकता और परंपरा के संगम को दर्शाती है।
  • प्रारंभिक चुनौतियाँ: वर्ष 2000 में, उत्तराखंड भौगोलिक कठिनाइयों, सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों से घिरा एक नवजात राज्य था।
  • विकास के नए मानक: पिछले 25 वर्षों में, राज्य ने इन चुनौतियों से लड़कर न केवल प्रगति की है, बल्कि विकास के नए मानक स्थापित किए हैं। यह प्रगति जनता के अटूट विश्वास से संभव हुई है।
  • राज्य की पहचान: उत्तराखंड की पहचान केवल अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता से नहीं है, बल्कि यह समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और अटूट आस्था का भी प्रतीक है।

सर्वसमावेशी विकास: शासन और योजनाओं का दृष्टिकोण

​प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए एक सर्वसमावेशी दृष्टिकोण अपनाया गया है, जो गांव से शहर तक और मातृशक्ति से श्रमशक्ति तक हर वर्ग को लक्षित करता है:

  • आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, खेल, पेयजल और हवाई कनेक्टिविटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
  • आत्मनिर्भरता की दिशा: लोकल फॉर वोकल, मेक इन इंडिया, और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से ‘विकसित भारत एवं विकसित उत्तराखंड’ के स्वप्न को साकार किया जा रहा है।
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था: स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य जारी है।

जनहित में लिए गए कठोर और महत्वपूर्ण निर्णय

​मुख्यमंत्री श्री धामी ने अपने कार्यकाल में जनहित में लिए गए कुछ कठोर और निर्णायक कदमों को रेखांकित किया:

वर्ग

निर्णय/पहल

सख्त कानून

धर्मांतरण विरोधी कानून, सख्त दंगारोधी कानून, और नकल विरोधी कानून।

सामाजिक-धार्मिक पहलें

लैंड जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद पर कार्रवाई; समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू करना; अवैध मदरसों पर कार्रवाई; और ऑपरेशन कालनेमि अभियान।

तकनीक और परम्परा का संगम: AIरोबोट का योगदान उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण अत्याधुनिक एआई (AI) रोबोट था, जिसने मंच से “डिजिटल इंडिया” की सफलता गाथा सुनाई। रोबोट ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान की उपलब्धियों का बखान किया और बताया कि कैसे भारत आज विश्व का टेक्नोलॉजी हब बन चुका है। यह तकनीकी प्रस्तुति कार्यक्रम में आधुनिकता और परंपरा के संगम को दर्शाती है।

भ्रष्टाचार पर नीति

भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत कठोर कार्यवाही।

हरिद्वार का विकास और कुंभ 2027 की तैयारी

​मुख्यमंत्री ने हरिद्वार को विश्वस्तरीय शहर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और प्रमुख विकास परियोजनाओं का विवरण दिया:

  • शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर: ₹186 करोड़ का सीवरेज नेटवर्क और ₹187 करोड़ से अधिक की पेयजल परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
  • स्वास्थ्य और शिक्षा: मेडिकल कॉलेज का निर्माण और लालढांग क्षेत्र में मॉडल डिग्री कॉलेज की स्थापना।
  • कनेक्टिविटी और कॉरिडोर:हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर का निर्माण (काशी विश्वनाथ और उज्जैन महाकाल कॉरिडोर की तर्ज पर), जिसकी डीपीआर तैयार है। ​हरकी पैड़ी से मां चंडी देवी तक रोपवे का निर्माण। ​हरिद्वार में हेलीपोर्ट और लालढ़ांग की बरसाती नदी में पुल का निर्माण।

कुंभ 2027 की तैयारी पर सख्त चेतावनी

मुख्यमंत्री ने कुंभ 2027 की तैयारियों पर बल दिया, लेकिन निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को गुणवत्तापूर्ण निर्माण करने की स्पष्ट चेतावनी दी, अन्यथा कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

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