मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार अर्द्धकुंभ को दिव्य व भव्य बनाने के लिए प्रयास किए, जिसके चलते पर्व स्नानों की तिथियां घोषित हुईं। हालांकि, इस बैठक में परंपराओं के उल्लंघन और आवाह्न अखाड़े के संतों को बाहर निकालने पर सवाल उठ रहे हैं।
- 12 अखाड़ों की भागीदारी: बाबा बलराम दास हठयोगी ने दावा किया कि बैठक में 13 नहीं, बल्कि केवल 12 अखाड़ों के प्रतिनिधि शामिल हुए, क्योंकि श्री शंभू दशनाम आवाह्न अखाड़े के श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज और थानापति सत्यानारायण गिरि महाराज को बैठक से बाहर कर दिया गया। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यह मनभेद का परिचायक है।
- परंपराओं का उल्लंघन: बाबा हठयोगी के अनुसार, कुंभ/अर्द्धकुंभ की बैठकों में आज तक किसी नेता ने शिरकत नहीं की, लेकिन इस बार बैठक में विधायक तक मौजूद थे, जो कि परंपरा का उल्लंघन है।
- शाही स्नान पर सवाल: चार शाही स्नानों की घोषणा के बाद, उन्होंने यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या अखाड़ों में धर्मध्वजा चढ़ेगी और पेशवाईयां निकलेंगी। उनका कहना है कि पेशवाई के बिना शाही स्नान का कोई औचित्य नहीं है।
- एकरूपता पर संदेह: उन्होंने संतों के विचारों में अचानक आई एकरूपता पर भी संदेह जताया और सवाल किया कि कहीं कोई बड़ा लेनदेन तो नहीं हुआ।
बाबा हठयोगी ने अर्द्धकुंभ के दिव्य व भव्य आयोजन का समर्थन किया, लेकिन साथ ही परंपराओं के उल्लंघन को बर्दाश्त न करने की बात भी कही।